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समय की नब्ज़ को पहचानती सार्थक लेखनी : महिंदर सूद विर्क

पुस्तक समीक्षा - 'सच्चे सुच्चे हरफ़'

पंजाबी माँ-बोली की सेवा में समर्पित, समय की नब्ज़ को पहचानते हुए हमेशा सार्थक और चढ़ती कला में रहने की प्रेरणा देने वाली कलम के धनी हैं — पंजाबी लेखक *महिंदर सूद विर्क*।

महिंदर सूद विर्क जी के चौथे काव्य-संग्रह *'सच्चे सुच्चे हरफ़'* में से ही विर्क जी का निर्मल व्यक्तित्व, उनकी हस्ती और उनके हँसते हुए चेहरे की झलक स्वतः ही मिलती है।

महिंदर सूद जी हमेशा परमात्मा को अपने अंग-संग मानते हुए, 'मैं-मेरी' से कोसों दूर, अपने सच्चे जज्बे को कथनी और करनी की एक सोच पर आधारित रखते हैं। वे हमेशा सत्य पर पहरा देते हुए अधिकतर विद्यार्थियों को प्रेरणा देने वाली और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने वाली रचनाओं की ही सृजना करते हैं।

समाज और परिवार में रहते हुए भी कवि की एक अपनी अलग दुनिया होती है। एक कवि हर सुख-दुख को बहुत नज़दीक से महसूस करते हुए अपनी संवेदनशीलता को एक कविता के रूप में पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करता है। ऐसी संवेदनशीलता सूद जी में सहज ही देखी जा सकती है।

उनके मुखारबिंद से निकला हुआ एक-एक सच्चा बोल उनके काव्य-संग्रह 'सच्चे सुच्चे हरफ़' को चाँद की चाँदनी की तरह और सूर्य के तेज की तरह चमकाता है। अर्थात् यह संग्रह आम जनता को चाँद की तरह कलेजे में ठंडक देता है और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए सूर्य के तेज की तरह मार्ग-दर्शन का काम करता है।

सूद जी के काव्य-संग्रह की रचनाओं को पढ़कर पता चलता है कि वह भी प्रसिद्ध कवि भाई वीर सिंह जी की तरह प्रकृति प्रेमी हैं, जिसमें उन्होंने प्राकृतिक नज़ारों को बहुत ही सुयोग्य ढंग से प्रस्तुत किया है।

जहाँ कवि अपनी रचना के ज़रिए मुर्दों में जान डालने की ताकत रखता है, वहीं वे लोक भलाई के कामों में हमेशा तत्पर रहते हुए बहुत छोटी उम्र से ही *'खून दान सबसे बड़ा दान'* की सेवा करके पुण्य कमा रहे हैं।

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