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शिक्षक दिवस पर विशेष : शिक्षा को उत्सव बनाने वाले शिक्षक - सतानंद पाठक

पन्ना जिले के पवई विकासखंड एक के गांव नारायणपुरा की सरकारी स्कूल की कहानी आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है, और इसके पीछे है एक शिक्षक का जुनून - *सतानंद पाठक*।

पवई विकासखंड की शासकीय माध्यमिक शाला नारायणपुरा में पदस्थ सतानंद पाठक सिर्फ एक शिक्षक नहीं, एक सपने देखने वाले और उसे पूरा करने वाले कर्मयोगी हैं। उनका मानना है कि सरकारी स्कूल की दीवारें भी प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा सुंदर और प्रेरणादायक होनी चाहिए, ताकि बच्चा स्कूल आने में गर्व महसूस करे।


*पुरस्कार राशि से बदली स्कूल की तस्वीर*

2019 में शिक्षक दिवस पर उनके नवाचारों के लिए उन्हें मध्यप्रदेश के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया। पुरस्कार में मिली 21,000 रुपये की राशि को उन्होंने खुद पर खर्च नहीं किया। अपनी जेब से अतिरिक्त राशि मिलाकर उन्होंने चित्रकार राजेश विश्वकर्मा के सहयोग से स्कूल की हर दीवार को ज्ञानवर्धक और रंग-बिरंगी पेंटिंग से सजा दिया। आज स्कूल की दीवारें बोलती हैं - कहीं अक्षर ज्ञान है, कहीं गणित के सूत्र, कहीं महापुरुषों के विचार।

इतना ही नहीं, उसी राशि से उन्होंने स्कूल के सभी बच्चों को स्वेटर और जूते वितरित किए और स्कूल परिसर में पेड़ लगाकर एक आकर्षक बगीचा तैयार किया।

*कोरोना काल के हीरो - बाइक वाली लाइब्रेरी*

जब कोरोना महामारी में स्कूल बंद हो गए और बच्चे घरों में कैद हो गए, तब सतानंद जी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल पर किताबों का झोला टांगा और घर-घर जाकर बच्चों को किताबें पहुँचाने लगे। उनकी यह *"मोटरसाइकिल लाइब्रेरी"* पूरे मध्यप्रदेश में चर्चा का विषय बनी।

*संस्कार और नवाचार का संगम*

उनके स्कूल में कई अनूठी परम्पराएं हैं जो किताबों में नहीं मिलतीं:

1.  *जन्मदिन पर पौधारोपण:* बच्चों का जन्मदिन केक काटकर नहीं, बल्कि पौधा लगाकर मनाया जाता है।

2.  *ईमानदारी की दुकान:* स्कूल में एक दुकान है जहाँ कोई दुकानदार नहीं होता। बच्चे सामान लेते हैं और पैसे गुल्लक में डाल देते हैं। इससे उनमें ईमानदारी का संस्कार आता है।

3.  *पक्षियों के लिए दाना-पानी:* स्कूल में पक्षियों के लिए नियमित दाना-पानी रखा जाता है।

4.  *खेल-खेल में शिक्षा:* रटने की जगह गतिविधि आधारित शिक्षण।

5.  *महापुरुषों की जयंती:* हर महापुरुष की जयंती और पुण्यतिथि पर बच्चों को उनके विचार बताए जाते हैं।

सतानंद पाठक कहते हैं, "मेरा सपना था कि मेरा स्कूल भी सुंदर और प्रेरणादायी लगे, जिससे बच्चे खुश हों और गांव वालों को अपने सरकारी स्कूल पर गर्व हो। यही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।"

सच ही है, एक शिक्षक अगर ठान ले तो वह सिर्फ एक स्कूल नहीं, पूरे गांव का भविष्य बदल सकता है। शिक्षक दिवस पर ऐसे प्रेरणादायी शिक्षक को शत-शत नमन।

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