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*बूढ़ादीत के सूर्य-मंदिर में 'लूंठो साहित्य संवाद' व ई-पत्रिका 'सैनाणी' का लोकार्पण, डॉ. अर्जुनदेव चारण बोले— भारतीय परंपरा में मां और मायड़ भाषा का स्थान सर्वोपरि*

*बूढ़ादीत, कोटा (राजस्थान) | 04 अप्रैल 2026, शनिवार*  

बूढ़ादीत स्थित सूर्य मंदिर प्रांगण में मायड़ भासा साहित्य संस्कृति मंच बूढ़ादीत-टाकरवाड़ा एवं हाड़ीराणी राजस्थानी भासा साहित्य संस्कृति समिति रोटेदा के संयुक्त तत्वावधान में 'लूंठो साहित्य संवाद उत्सव' तथा ई-पत्रिका 'सैनाणी' का लोकार्पण समारोह आयोजित हुआ।

*मुख्य अतिथि का संबोधन*  

समारोह के मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के राजस्थानी परामर्श मंडल संयोजक डॉ. अर्जुनदेव चारण ने कहा, "भारतीय पुरातन परंपरा में पौराणिक नाम मां के नाम पर ही होते हैं। मां का नाम अदिति होने से सूर्य आदित्य कहलाए। हमारी संस्कृति में मां और मायड़ भाषा का स्थान सबसे ऊपर माना गया है।"

*विशिष्ट वक्ताओं के विचार*  

समारोह की अध्यक्षता कर रहे मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. नरेंद्र नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि बोलियां हमारी संस्कृति की जान हैं। बोलियां बचेंगी तो संस्कृति भी बचेगी। विशिष्ट अतिथि ख्यातनाम साहित्यकार अंबिकादत्त ने राजस्थानी में समरूपता और बोलियों में एकरूपता की आवश्यकता बताई। चंदालाल चकवाला ने हाड़ौती संभाग में राजस्थानी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।

*कार्यक्रम की शुरुआत व पत्रिका लोकार्पण*  

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा सरस्वती चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। सरस्वती वंदना कवि विष्णु विश्वास ने प्रस्तुत की। स्वागत भाषण सी. एल. सांखला ने दिया। 

साहित्यकार देवकी दर्पण, लोकेश आजाद व मुकेश गौतम द्वारा संपादित ई-पत्रिका 'सैनाणी' का लोकार्पण किया गया। मुख्य संपादक देवकी दर्पण ने पत्रिका के बारे में जानकारी दी। डॉ. क्षमा चतुर्वेदी व कवि ओम सोनी 'मधुर' ने भी विचार व्यक्त किए।

*सम्मान समारोह*  

- *'श्री आदित्य रत्न सम्मान'*: डॉ. नरेंद्रनाथ चतुर्वेदी  

- *'आदित्य प्रभा सम्मान'*: डॉ. क्षमा चतुर्वेदी  

- *'श्रीमती धापू बाई-श्री नैनाराम मीणा स्मृति सम्मान-पुरस्कार'*: चंदालाल चकवाला को राजस्थानी भाषा साहित्य सेवा हेतु, पुरस्कार स्वरूप 5100 रुपये नकद प्रदान किए गए  

- *'मायड़ भासा सम्मान'*: देवकी दर्पण, चौथमल प्रजापति, मुकेश गौतम, रामस्वरूप रावत, दिलीप सिंह हरप्रीत, दीनबंधु परालिया, लोकेश आजाद, अरविंद अंगार को राजस्थानी सेवा हेतु  

- *'आदर्श शिक्षक सम्मान'*: 81 वर्षीय बिरधीलाल मालव व ओम प्रकाश मीणा को  

- *'मेधावी विद्यार्थी सम्मान'*: वर्षा गोचर, वंशिका गोचर, योगिता सुमन, कशिश मालव, पायल मेघवाल, अनुष्का मीणा, विशाल सुमन सहित माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को

*उपस्थित गणमान्य रचनाकार*  

समारोह में जयसिंह आशावत, रघुराज सिंह कर्मयोगी, राधेश्याम पांचाल, रविंद्र बीकावत, विष्णु विशाल, तेजकरण यादव, सुरेश यादव, बिरधीलाल मालव, पं. घनश्यामाचार्य गौतम, परमानंद गोस्वामी, महावीर धन्वंतरी, महावीर मयंक, महावीर प्रसाद मालव, सत्य प्रकाश शर्मा, महावीर रेनवाल, दीपेश सुमन, दीनबंधु परालिया, मनीष मेहरा, पप्पू मेघ, मेघश्याम मालव, मनोज सोनी, पुष्कर चौधरी, दुष्यंत सांखला, कार्तिक मालव, विष्णु मेघ सहित कई वरिष्ठ व युवा रचनाकार शामिल हुए।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. नंद किशोर महावर ने किया। सह संयोजक कवि आर. सी. आदित्य ने आभार व्यक्त किया। समारोह का समापन "जय जय राजस्थान! जय जय राजस्थानी" के उद्घोष के साथ हुआ।


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