125 साहित्यकार सम्मानित, 9 पुस्तकों का लोकार्पण; जरूरतमंद को रक्तदान का संकल्प, अगला अधिवेशन इंदौर में
*गांधीनगर, 13/04/2026।* समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत (चैरिटेबल ट्रस्ट) के तत्वावधान में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ऑडिटोरियम, सेक्टर-12, गांधीनगर में आयोजित दो दिवसीय *11वां राष्ट्रीय अधिवेशन* रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। साहित्यिक एवं सामाजिक सरोकारों को समर्पित इस महाकुंभ में देशभर से 125 से अधिक साहित्यकारों को सम्मानित किया गया तथा 9 कृतियों का भव्य लोकार्पण किया गया।
*द्वितीय दिवस की मुख्य घोषणाएं:*
अधिवेशन के दूसरे दिन सर्वसम्मति से दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए - *1. 'जरूरतमंद को रक्तदान' सेवा प्रकल्प* को संस्थान की वार्षिक गतिविधियों में स्थायी रूप से शामिल करना तथा *2. अगला 12वां राष्ट्रीय अधिवेशन इंदौर, मध्य प्रदेश में आयोजित करना।*
संस्थान के *संस्थापक एवं संयोजक डॉ. मुकेश कुमार व्यास 'स्नेहिल'* ने *एक लाख रुपए के 'स्मृतिशेष पुष्पा देवी व्यास समरस साहित्य शिरोमणि एवं उत्कृष्ट समरस सेवा अलंकरण'* की घोषणा करते हुए इस वर्ष का प्रथम पुरस्कार संस्थान की *राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन, कोटा* को उनकी उल्लेखनीय साहित्यिक एवं सामाजिक सेवाओं के लिए प्रदान किया, जिसका पूरे सदन ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।
*उद्घाटन सत्र:*
गणेश जी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन, समरस गान एवं सुशीला लोवादा के स्वागत नृत्य के साथ अधिवेशन का शुभारंभ हुआ। *मुख्य अतिथि डॉ. केदार सावरीकर*, निदेशक चेस ग्लोबल इंडिया, गांधीनगर तथा *विशिष्ट अतिथि* सत्यनारायण शर्मा, चंद्रा डिजिटल स्टूडियो, नरेन्द्र सिंह राजपुरोहित, अध्यक्ष गुजरात फाउंडेशन, भूपेश प्रजापति, अध्यक्ष एन.पी.पी. सेवा ट्रस्ट, डॉ. सुनील कुमार जोशी, न्यू तृप्ति हॉस्पिटल ने संस्थान के साहित्यिक एवं सामाजिक सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की।
*संस्थान की उपलब्धियां:*
डॉ. मुकेश कुमार व्यास ने बताया कि संस्थान की *18 राज्यों एवं 3 देशों में इकाइयां कार्यरत हैं जिनसे 43 हजार साहित्यकार सदस्य जुड़े हैं।* गत वर्ष 'भूखे को भोजन, प्यासे को पानी' सेवा प्रकल्प के बाद अब 'जरूरतमंद को रक्तदान' प्रकल्प भी जोड़ा गया है। 'प्रेम पुष्प भाग-2' में रचना भेजने वाले समरसी सदस्यों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
*लोकार्पित कृतियां:*
समारोह में *9 पुस्तकों का लोकार्पण* किया गया -
1. *प्रेम पुष्प भाग-2* - 125 सदस्यों की दो-दो कविताओं एवं संक्षिप्त परिचय सहित, संपादन डॉ. शशि जैन
2. *चलते-चलते* - सुरेन्द्र शर्मा 'बसर'
3. *अंतर्द्वंद्व* - विजय प्रताप सिंह
4. *कविता संग्रह* - अमरनाथ मूर्ति एवं राजेंद्र नाथ मूर्ति
5. *यादों के साए* - सुधांश शेखर बख्शी
6. *परत दर परत एक नारी* - रूपाली गर्ग
7. *साहित्य में पर्यावरण, पर्यटन और अध्यात्म* - डॉ. शशि जैन एवं डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
8. *उन्मुक्त गगन उड़ती पतंग* - डॉ. वैदेही गौतम
9. *सांस्कृतिक थाती लोक मांडना कला* - डॉ. संगीता देव
*कवि सम्मेलन एवं रक्तदान:*
आयोजित कवि सम्मेलन में *108 कवियों ने देशभक्ति, सामाजिक समरसता, हास्य-व्यंग्य एवं रक्तदान* जैसे विषयों पर प्रभावी काव्यपाठ किया। प्रथम दिन साहित्यिक भ्रमण के तहत साहित्यकारों ने गांधीनगर के दर्शनीय स्थलों के साथ *एशिया के सबसे बड़े आधुनिक ब्लड बैंक* का भ्रमण किया तथा अनेक साहित्यकारों ने रक्तदान कर इंसानियत की मिसाल कायम की।
*समापन सत्र:*
समापन सत्र में *श्री गिरीश शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सतीन देसाई, अनिता राजपुरोहित, महेंद्र जोशी 'रक्तक्रांति', भरत पांडेय, शशिकांत चतुर्वेदी, भरत जोशी, विक्रमसिंह राजपूत* आदि ने विचार व्यक्त किए। *राष्ट्रीय महामंत्री आनंद जैन 'अकेला' एवं डॉ. विजयप्रताप सिंह* ने सभी का आभार व्यक्त कर भविष्य में सहयोग की कामना की।
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