विज्ञापन

WELCOME TO U NEWS

ऐतिहासिक काव्यगोष्ठी: मानसरोवर के पटल पर गूँजी 'आज़ाद' की हुंकार, शहीद चंद्रशेखर के प्रपौत्र ने किया राष्ट्र का आह्वान

  "दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आज़ाद ही रहे हैं, आज़ाद ही रहेंगे!"


​राजस्थान/ऑनलाइन: भारत के स्वाभिमान और अदम्य साहस के पर्याय, महान क्रांतिकारी अमर शहीद चंद्रशेखर 'आज़ाद' की पुण्यतिथि के अवसर पर 'मानसरोवर साहित्य अकादमी, राजस्थान' के पटल पर एक ऐतिहासिक ऑनलाइन श्रद्धांजलि कार्यक्रम और विशेष काव्यगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस गौरवमयी आयोजन ने तब इतिहास रच दिया जब शहीद आज़ाद के प्रपौत्र श्री अमित आज़ाद ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की और देशवासियों के नाम एक ओजस्वी संदेश दिया।

​विशिष्ट अतिथि श्री अमित आज़ाद का संदेश

​मानसरोवर काव्य मंच के संस्थापक श्री मानसिंह सुथार 'मान' के मार्गदर्शन में आयोजित इस गोष्ठी में श्री अमित आज़ाद की उपस्थिति ने राष्ट्रभक्ति की अलख जगा दी। अमित जी ने मानसरोवर परिवार को बधाई देते हुए कहा, "आप एक महान सोच लेकर चल रहे हैं और आपके इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से गर्व की बात है।" उन्होंने आज़ाद जी के निजी जीवन से जुड़े अनछुए पहलुओं को साझा किया और उनकी ओरिजनल तस्वीरें दिखाकर सभी को भावुक कर दिया। देशवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि आज हमें राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रप्रेम को सर्वोपरि रखना होगा।

​लोकेश कुमार मीणा 'आज़ाद' का ओजपूर्ण संचालन

​इस विशेष काव्यगोष्ठी का अत्यंत प्रभावी और गरिमामयी संचालन श्री लोकेश कुमार मीणा 'आज़ाद' ने किया। उनके शब्दों के चयन और ओजस्वी वाणी ने पूरे कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति का ऐसा संचार किया कि ऑनलाइन जुड़े सैकड़ों श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। लोकेश जी ने मुख्य अतिथि और समस्त रचनाकारों का स्वागत जिस आत्मीयता और जोश के साथ किया, उसने इस गोष्ठी को एक नई ऊंचाई प्रदान की।

​रचनाकारों की शब्दांजलि

​इस ऐतिहासिक काव्य-यज्ञ में देश के विभिन्न कोनों से बारह से अधिक प्रबुद्ध रचनाकारों ने अपनी आहुति दी, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:

​श्री जयशंकर सिंह एवं श्री अवधेश कुमार श्रीवास्तव

​श्री विजय कुमार श्रीवास्तव एवं श्री मधुमंगल सिंह

​श्रीमती मधु निगम, श्रीमती इला शरण

​श्रीमती राधा कौशिक एवं श्रीमती नीता माथुर 'मीत' आदि।

​शहादत को विशेष शब्दांजलि

​कार्यक्रम के अंत में उन अमर बलिदानियों को याद करते हुए इन ओजपूर्ण पंक्तियों से श्रद्धांजलि अर्पित की गई:

​लहू से लिख गए गाथा, अमर वो नाम बाकी है,

वतन की धूल में लिपटा, अमित पैग़ाम बाकी है।

दिए जो प्राण हँस-हँस कर, न भूले देश ये उनका,

शहादत का हमारी रूह पर, "कर्ज़ हम पर बाकी है"।।

उद्देश्य की सफलता और आभार

​संस्थापक श्री मानसिंह सुथार ने सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिस पवित्र उद्देश्य और संकल्प के साथ यह काव्यगोष्ठी रखी गई थी, वह पूर्णतः सफल रही। उन्होंने अंत में विशिष्ट अतिथि श्री अमित आज़ाद जी, कुशल संचालक श्री लोकेश कुमार मीणा 'आज़ाद' एवं समस्त सहभागी रचनाकारों व श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।

Post a Comment

0 Comments