📖 लोक-चेतना और वैज्ञानिक अध्ययन विधि का समन्वय
हिंदी साहित्य का इतिहास केवल शुष्क तिथियों और नामों की सूची नहीं है। यह हमारे पूर्वजों की जीवंत चेतना और लोक-संस्कृति के विकास का महा-दस्तावेज है। इस संवादात्मक पोर्टल को इस प्रकार अभिकल्पित (design) किया गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी कठिन से कठिन सिद्धांतों, संप्रदायों, कवियों के कालक्रमों और ग्रंथों को काव्यात्मक स्मरण सूत्रों (Tricks) के माध्यम से चुटकियों में आत्मसात कर सकें।
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वैज्ञानिक वर्गीकरण
रामचंद्र शुक्ल और हजारी प्रसाद द्विवेदी के सर्वमान्य सिद्धांतों पर आधारित सघन तथ्य संग्रह।
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काव्यात्मक स्मरण सूत्र
१८ अत्यंत सुंदर और सरस छंदमय कविताएँ जो पूरे कालक्रम को पलक झपकते याद करा देंगी।
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संवादात्मक रिवीज़न
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अष्टछाप / सूफी ग्रंथ विवरण
परीक्षा में समय बचाने और सर्वथा सही चुनाव के लिए १८ प्रामाणिक सूत्र
🏛️ भारतीय काव्यशास्त्र: छः प्रमुख संप्रदाय
दूसरी सदी ई.पू.
रस संप्रदाय
प्रवर्तक: भरतमुनि
मूल ग्रंथ: नाट्यशास्त्र (पंचम वेद)
छठी सदी ई.
अलंकार संप्रदाय
प्रवर्तक: भामह
मूल ग्रंथ: काव्यालंकार
आठवीं सदी ई.
रीति संप्रदाय
प्रवर्तक: वामन
मूल ग्रंथ: काव्यालंकार सूत्रवृत्ति
नौवीं सदी ई.
ध्वनि संप्रदाय
प्रवर्तक: आनंदवर्धन
मूल ग्रंथ: ध्वन्यालोक
दसवीं सदी ई.
वक्रोक्ति संप्रदाय
प्रवर्तक: कुंतक
मूल ग्रंथ: वक्रोक्तिजीवितम
ग्यारहवीं सदी ई.
औचित्य संप्रदाय
प्रवर्तक: क्षेमेंद्र
मूल ग्रंथ: औचित्य विचार चर्चा
🧪 भरतमुनि के रस सूत्र के चार महा-व्याख्याकार
रस सूत्र: "विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः"
भट्ट लोल्लट
दार्शनिक मत: मीमांसा दर्शन
मूल सिद्धांत: उत्पत्तिवाद या आरोपवाद
शंकुक
दार्शनिक मत: न्याय दर्शन
मूल सिद्धांत: अनुमितिवाद
भट्ट नायक
दार्शनिक मत: सांख्य दर्शन
मूल सिद्धांत: भुक्तिवाद या भोगवाद (साधारणीकरण प्रणेता)
अभिनवगुप्त
दार्शनिक मत: शैव दर्शन
मूल सिद्धांत: अभिव्यक्तिवाद
🌍 पाश्चात्य काव्यशास्त्र (Western Poetics)
| विचारक |
देश / समय |
प्रमुख सिद्धांत / विचार |
| प्लेटो |
यूनान (427-347 ई.पू.) |
कला की अनुकृति (सत्य से तिगुनी दूर), काव्य का अनैतिक प्रभाव। |
| अरस्तू |
यूनान (384-322 ई.पू.) |
अनुकरण सिद्धांत (Mimesis), विरेचन सिद्धांत (Catharsis), त्रासदी सिद्धांत। |
| लोंगिनस |
यूनान (तीसरी सदी ई.) |
उदात्त सिद्धांत (On the Sublime)। |
| वर्डसवर्थ |
इंग्लैंड (1770-1850 ई.) |
काव्य भाषा का सिद्धांत (Lyrical Ballads, 1798)। |
| कॉलरिज |
इंग्लैंड (1772-1834 ई.) |
कल्पना और फैंटेसी (Imagination and Fancy)। |
| टी. एस. इलियट |
अमेरिका/इंग्लैंड (1888-1965) |
निर्वैयक्तिकता का सिद्धांत, परंपरा की अवधारणा। |
| आई. ए. रिचर्ड्स |
इंग्लैंड (1893-1979) |
मूल्य सिद्धांत (Value Theory), संप्रेषण सिद्धांत (Communication)। |
| क्रोचे |
इटली (1866-1952) |
अभिव्यंजनावाद (Intuition and Expression)। |
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