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निराला के गीत हाड़ौती की सांस्कृतिक धरोहर - निर्मोही

  


      कोटा, निराला के हाड़ौती अंचल की सांस्कृतिक धरोहर हैं।यह वक्तव्य वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार जितेन्द्र निर्मोही ने दि 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस पर जगदीश निराला की दो कृतियों " रुपाली म्हारी मांगरोळ" और " उमंग" के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद रघुराज सिंह हाड़ा के बाद हाड़ौती बोली के जो भी गीतकार आए उनमें तीन विश्वामित्र दाधीच, धन्ना लाल सुमन और जगदीश निराला भक्ति काव्य और मंडलियों से आए। विश्वामित्र दाधीच और जगदीश निराला में साम्यता यह पाई जाती है कि उन्होंने लोक गीतों के साथ साथ अपने गांवों की ढाई कड़ी की रामलीला को भी सम्पृक्त किया। धन्ना लाल सुमन और जगदीश निराला ने अपने लोक रंजन से हाड़ौती अंचल की बोली को समृद्ध किया सामाजिक सरोकार, भ्रष्टाचार और बदलते मनुष्य की फितरत को उन्होंने हाड़ौती के आंचलिक शब्दों से उकेरा।यह वक्तव्य उन्होंने एस आर रंगनाथन सभागार मंडल पुस्तकालय कोटा में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन से व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन नहुष व्यास ने किया।

         अपने स्वागत भाषण में डा दीपक श्रीवास्तव ने पुस्तकों और रचनाकारों को आधुनिक युग में प्रसांगिक बताते हुए कहा कि कोई भी साहित्यकार बिना मूल साहित्य के स्थापित नहीं हो सकता, वर्तमान समय में रचनाकार बहुत जल्दी प्रसिद्धि पाना चाहते हैं। सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय में इन दिनों जो आयोजन हो रहे हैं वो देश के किसी भी नगर के समारोह से गुणात्मक दृष्टि से कम नहीं है। जगदीश निराला के कृतित्व और व्यक्तित्व पर बीज वक्तव्य डालते हुए प्रोफेसर के बी भारतीय ने कहा कि वह सभी को एक साथ लेकर चलने की सीख देते हैं।उनका साहित्य अभिजात्य साहित्य से इतर लोक सम्पृक्त साहित्य है जिसकी सहजता को भुलाया नहीं जा सकता। मुख्य वक्ता विजय जोशी ने कहा कि उनके साहित्य में आम जन की पीड़ा को भी देखा जा सकता है।उनका राजस्थानी साहित्य तो अपने स्थान पर है ही लेकिन उनकी लोक जुंबिश हिन्दी साहित्य में भी देखी जा सकती है। सभा को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तरुण कांत सोमानी  स्पेशल  सेल              , डॉ सुरेश पाण्डेय, डॉ चंद्र शेखर सुशील ने सम्बोधित किया। आयोजन के मुख्य अतिथि धर्मराज भारत पूर्व जिला सत्र न्यायाधीश थे। रचनाकार जगदीश निराला ने अपने कैसेट गीतों की प्रस्तुति पर अपनी अर्द्धांगिनी के साथ किया, उन्होंने मांगरोल की ढाई कड़ी की रामलीला में जो रावण का अभिनय करते हैं उसका मंचन भी किया उन्होंने कहा एक रचनाकार की रचना प्रक्रिया में उसके परिजनों का सहयोग आवश्यक है। मैं सरकारी सेवा में सत्रह साल सस्पेंड रहा हूं लेकिन मेरी रचना प्रक्रिया पर प्रभाव नहीं पड़ा। समारोह में सरस्वती वंदना प्रेम शास्त्री ने पढी धन्यवाद डॉ शशि जैन ज्ञापित किया। समारोह में डॉ योगेन्द्र मणि, योगेश यथार्थ, बद्री लाल दिव्य,किशन वर्मा का सम्मान किया गया। पुस्तक दिवस के अवसर पर पुस्तकालयाध्यक्ष द्वारा पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष गजेंद्र व्यास, साहित्यकार डॉ अतुल चतुर्वेदी, मेघना मेहरा, बिगुल जैन, हेमराज सिंह हेम आदि का सम्मान किया गया।

             

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