......................
पन्ना, पवई, शासकीय माध्यमिक शाला नारायणपुरा में विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर पौधारोपण करते हुए शिक्षक सतानंद पाठक ने छात्र-छात्राओं को बताया कि
हिंदी भारत की राजभाषा ही नहीं बल्कि भारत की एकता का सूत्र भी है।
अंग्रेजी के समानान्तर हिंदी लगातार तेजी से भारत की संपर्क भाषा बन चुकी है।
यह सब स्वतः हो रहा है। क्योंकि हिंदी हमारी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक आवश्यकता पूरी करती है।
इसे ज्ञान-विज्ञान, चिंतन और सृजन से लगातार समृद्ध करते जाना भारत के लिए अत्यंत जरूरी है।
हिंदी को लेकर भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी आकर्षण है। करोड़ों प्रवासी भारतीयों के लिए यह अपने मूल देश से जुड़ाव का एकमात्र सूत्र तो है ही।
साथ ही दक्षिण एशिया के तमाम देशों में इसे बहुत से लोग समझते हैं। ऐसे ही नहीं यह दुनिया की सबसे बड़ी भाषाओं में से एक है आज की कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक श्रीमती माया खरे, शिक्षक सिद्धार्थ सागर एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे ।


0 Comments