बूटाटी धाम में होते हैं अनोखे आरती से चमत्कार , लकवा(Paralysis) पीड़ित
पंकज बाफना की रिपोर्ट
( बूटाटी धाम ) चतुरदाज जी महाराज के नाम से भी है मशहूर मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकमानाएं पूरी होती हैं। साथ ही लकवा (Paralysis) के रोगियों को राहत मिलती है।
विज्ञान के पास जब सवालों के जवाब खत्म हो जाते हैं, तब भगवान अपना चमत्कार दिखाते हैं। ऐसा ही अद्भुत नजारा यहां बूटाटी धाम है, जिसे चतुरदास जी महाराज मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। बूटाटी धाम में हर दिन सैकड़ों लोग लकवा का इलाज कराने आते हैं।
पंकज बाफना ने बताया कि बुटाटी धाम की मान्यता ऐसी है कि यहां पूरे देश लकवाग्रस्त पीड़ित आते हैं। मंदिर 7 परिक्रमा से लकवा के रोग से मुक्त कराने के लिए प्रसिद्ध है। यहां लकवा के मरीजों को सात दिन का प्रवास करते हुए रोज एक परिक्रमा लगानी होती है। सुबह की आरती के बाद पहली परिक्रमा मंदिर के बाहर तथा शाम की आरती के बाद दूसरी परिक्रमा मंदिर के अन्दर लगानी होती है। ये दोनों परिक्रमा मिलकर पूरी एक परिक्रमा कहलाती है। सात दिन तक मरीज को इसी प्रकार परिक्रमा लगानी होती है। बूटाटी धाम अपनी चमत्कारी शक्तियों से लकवा सही करने के लिए काफी मशहूर है।
परिक्रमा पूरी करने के बाद मरीज में कुंड की भभूती मरीज को लगाई जाती है, जिसके बाद उसके सभी रोग दूर हो जाते हैं। ये पूरी प्रक्रिया किसी चमत्कार से कम नहीं है। सबसे पहले तो मरीज की बीमारी खत्म हो जाती है। चल नहीं पाते। इसके अलावा जो बोल नहीं पाते उनकी भी समस्या का परिक्रमा लगाने से सब कष्ट दूर हो जाते हैं इसके बाद पीड़ित की बीमारी अपने आप ठीक होती चली जाती है। इस मंदिर में मरीज और उनके परिजनों के खाने—रहने की नि:शुल्क व्यवस्था होती है।
0 Comments