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देश का आखरी और बहुचर्चित दिवराला सती प्रकरण, महिमा मंडन पर 39 लोगो के खिलाफ हुआ था मामला दर्ज 36साल बाद आया फेसला

 देश का आखरी और बहुचर्चित दिवराला सती प्रकरण, 


महिमा मंडन पर 39 लोगो के खिलाफ हुआ था मामला दर्ज


36साल बाद आया फेसला


  जयपुर महानगर द्वितीय की सती निवारण स्पेशल कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। इसमें कोर्ट ने श्रवण सिंह, महेंद्र सिंह, निहाल सिंह, जितेंद्र सिंह, उदय सिंह, नारायण सिंह, भंवर सिंह और दशरथ सिंह को बरी कर दिया है।


*18 साल की उम्र में हुई थी सती*


 जयपुर की रहने वाली 18 साल की रूपकंवर की शादी दिवराला के मालसिंह शेखावत (24) से हुई थी। शादी के सात महीने बाद ही मालसिंह गंभीर रूप से बीमार हुए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पति के निधन के बाद रूपकंवर ने सती होने की इच्छा जताई। हालांकि पुलिस जांच में यह बात सही नहीं निकली।4 सितंबर 1987 को रूपकंवर सती हो गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने उसे सती मां का रूप दिया और उसकी याद में मंदिर का निर्माण करवाया। वहां पर चुनरी महोत्सव का आयोजन भी किया गया। तब घटना का महिमामंडन करने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी सरकार ने 39 लोगों के खिलाफ हाईकोर्ट में केस दर्ज करवाया था।

आजादी के बाद राजस्थान में सती के 29 केस आजादी के बाद राजस्थान में सती के 29 केस हुए, रूपकंवर आखिरी थीं। रूपकंवर के सती होने की घटना विश्व में चर्चित घटना थी। प्रदेश व देश की बदनामी हुई। इस घटना ने काफी तूल पकड़ा था।

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