आप सभी को पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...
पन्ना, पवई, पर्यावरण प्रेमी शिक्षक सतानंद पाठक में पितृ दिवस के अवसर पर पौधारोपण करते हुए बताया कि पिता को शब्दों में परिभाषित करना मुमकिन नहीं क्योंकि पिता की सीमाएं अनंत है। पिता से ही हमारी पहली पहचान होती हैं, जब हम छोटे होते हैं तो सर्वप्रथम किसी के भी द्वारा हमसे हमारे पिता का नाम ही पूछा जाता हैं।
मां यदि हमें ठंढी छांव देकर पालती- पोषती है तो पिता कड़क धूप में मेहनत कर हमारे सारे सपनों, सारी इच्छाओं को पूरा करते हैं। मां यदि बच्चे को ममता से सींचती हैं तो पिता अपने खून-पसीना से हमें सींचते हैं। पिता के बिना तो हमारी मां भी अधूरी है, उनके बिना पूरा परिवार ही अधूरा है।पिता ही हमारे परिवार की नींव और आधार होते हैं। हर मुश्किल वक्त में सहारा और हौसला देने वाले पिता ही वह इकलौता शख्स हैं, जो खुद से ज्यादा हमारी कामयाबी की दुआ करते हैं, हर हालात से जूझने की शक्ति प्रदान करते हैं और हमारे मार्गदर्शक भी हमारे पिता ही होते हैं।

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