यह हिंदी साहित्य के प्रमुख पाठ्यक्रमों (जैसे UPSC, UGC-NET, या विभिन्न राज्यों के Assistant Professor व PGT/TGT) के अनिवार्य टेक्स्ट (पाठ्य-सामग्री) की सूची है। इसमें कविता (पद्य), उपन्यास, कहानी और नाटक की कुछ बेहद कालजयी और परीक्षा-उपयोगी रचनाएँ शामिल हैं।
परीक्षा की दृष्टि से इन सभी रचनाओं के मूल भाव, प्रमुख पात्र और महत्वपूर्ण व्याख्यात्मक पंक्तियों को समझना बेहद जरूरी है। आइए इन सभी टेक्स्ट का एक त्वरित 'क्रैश-कोर्स रीकैप' (Quick Revision Overview) देख लेते हैं:
1. पद्य भाग (काव्य कृतियाँ)
🌸 जायसी ग्रंथावली (नागमती वियोग खंड) — सं. आचार्य रामचंद्र शुक्ल
- मूल प्रतिपाद्य: राजा रत्नसेन जब पद्मावती को पाने के लिए सिंहलद्वीप चले जाते हैं, तब उनकी पहली पत्नी नागमती के विरह का वर्णन है। यह हिंदी साहित्य का सबसे उत्कृष्ट विरह-वर्णन माना जाता है।
- प्रमुख विशेषता: इसमें 'बारहमासा' पद्धति (आषाढ़ से शुरू होकर जेठ महीने तक) के माध्यम से प्रकृति के बदलते रूपों के साथ नागमती के दुखों को जोड़ा गया है। इसमें लोक-जीवन का ठेठ अवधी पुट है।
- प्रसिद्ध पंक्ति: "पीउ सों कहेहु संदेसड़ा, हे भँवर हे काग। सो धनी बिरहें जरि मुई, तेहिक धुआँ हम्ह लाग॥"
🍂 घनानंद कवित्त (प्रथम 10 छंद) — सं. आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र
- मूल प्रतिपाद्य: रीतिकाल के 'रीतिमुक्त' कवि घनानंद की कविताएँ सुजान (उनकी प्रेमिका) के प्रति उनके अगाध प्रेम और विरह की अभिव्यक्ति हैं। यहाँ लौकिक प्रेम आगे चलकर अलौकिक (कृष्ण प्रेम) में बदल जाता है।
- प्रमुख विशेषता: ब्रजभाषा का अत्यंत शुद्ध और मर्मस्पर्शी प्रयोग। इसमें प्रेम की पीर और मन का अंतर्द्वंद्व मुख्य है।
- प्रसिद्ध पंक्ति (छंद 1): "अति सूधो सनेह को मारग है, जहाँ नेकु सयानप बांक नहीं।"
🏛️ साकेत (नवम सर्ग) — मैथिलीशरण गुप्त
- मूल प्रतिपाद्य: गुप्त जी ने द्विवेदी युग में उपेक्षित रह गईं 'उर्मिला' (लक्ष्मण की पत्नी) के विरह को केंद्र में रखकर इस सर्ग की रचना की।
- प्रमुख विशेषता: उर्मिला का विरह केवल रोने-धोने का नहीं है, बल्कि उसमें आत्मगौरव, राष्ट्र-सेवा के प्रति सम्मान और प्रकृति के साथ तादात्म्य है।
- प्रसिद्ध पंक्ति: "तनुजा, तनिक अनल तो ला। ... मानस-मंदिर में सती, पति की प्रतिमा थाप। जलती सी उस विरह में, पुरा करती थी जाप॥"
🏹 राम की शक्ति पूजा — सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
- मूल प्रतिपाद्य: जैसा कि हमने 'लंबी कविताओं' में पढ़ा था, यह निराला की कालजयी रचना है। इसमें राम और रावण के युद्ध के माध्यम से मानव मन के संशय, निराशा और अंततः शक्ति की मौलिक कल्पना कर विजय प्राप्त करने का चित्रण है।
- प्रमुख विशेषता: इसमें निराला का अपना व्यक्तिगत जीवन-संघर्ष भी झलकता है। इसकी शुरुआत संस्कृतनिष्ठ, सामासिक और ओजपूर्ण खड़ी बोली से होती है।
- प्रसिद्ध पंक्ति: "अन्याय जिधर, हैं उधर शक्ति! कहते-कहते छले नयन, कुछ बूंद सजग चित्त में गिरे।" और "होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन।"
2. गद्य भाग (उपन्यास, कहानियाँ और नाटक)
👶 आपका बंटी (उपन्यास) — मन्नू भंडारी
- मूल प्रतिपाद्य: यह आधुनिक हिंदी साहित्य का एक मील का पत्थर उपन्यास है, जो तलाकशुदा माता-पिता के बीच पिस रहे एक छोटे बच्चे 'बंटी' के मनोवैज्ञानिक शोषण और अकेलेपन को दिखाता है।
- प्रमुख पात्र: बंटी (मुख्य बाल पात्र), शकुन (माँ), अजय (पिता), डॉ. जोशी (सौतेले पिता), वकील चाचा।
📜 कहानियाँ (विशेष संकलन)
- कफ़न (प्रेमचंद - 1936): यह प्रेमचंद की अंतिम और सबसे यथार्थवादी कहानी है। यह गरीबी के उस चरम रूप को दिखाती है जहाँ मानवीय संवेदनाएँ पूरी तरह मर जाती हैं।
- पात्र: घीसू, माधव और बुधिया (जो प्रसव पीड़ा से मर जाती है और दोनों उसके कफ़न के पैसों से शराब-चिकन खा लेते हैं)।
- पुरस्कार (जयशंकर प्रसाद): प्रेम, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्य के बीच द्वंद्व की कहानी।
- पात्र: मधुलिका और अरुण। मधुलिका देश की रक्षा के लिए अपने प्रेमी अरुण के राष्ट्रद्रोह की खबर राजा को देती है, पर अंत में पुरस्कार के रूप में अपने लिए भी प्राणदंड मांगती है।
- गैंग्रीन / रोज़ (अज्ञेय): आधुनिक मध्यवर्गीय नारी के जीवन की नीरसता, ऊब और यांत्रिकता (मशीन जैसा जीवन) को दर्शाने वाली बेहतरीन मनोवैज्ञानिक कहानी।
- पात्र: मालती, महेश्वर (पति - डॉक्टर) और टिटी (बच्चा)।
- गदल (रांगेय राघव): राजस्थानी पृष्ठभूमि (लूहारी जाति) पर आधारित एक अत्यंत सशक्त, स्वाभिमानी और विद्रोही स्त्री 'गदल' की कहानी, जो सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर अपने तरीके से जीवन जीती है।
🎭 चंद्रगुप्त (नाटक) — जयशंकर प्रसाद
- मूल प्रतिपाद्य: इतिहास और कल्पना के सुंदर समन्वय से रचित ऐतिहासिक नाटक। इसमें यवन आक्रमणकारियों (सिकंदर) के खिलाफ भारत की राष्ट्रीय एकता और चाणक्य की कूटनीति के माध्यम से चंद्रगुप्त के सम्राट बनने की कथा है।
- प्रमुख पात्र: चाणक्य, चंद्रगुप्त, सिकंदर, सेल्युकस, कार्नेलिया (सेल्युकस की बेटी, जो भारत से प्रेम करती है), कल्याणी, अलका।
- प्रसिद्ध गीत (कार्नेलिया द्वारा गाया गया): "अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा॥"
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