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हिंदी साहित्य का इतिहास - अल्टीमेट मास्टर नोट्स पोस्टर
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हिंदी साहित्य का इतिहास एवं इतिहास लेखन परंपरा

अल्टीमेट क्विक रिवीजन मास्टर नोट्स भित्ति-पत्र

1. इतिहास लेखन की परंपरा और प्रमुख ग्रंथ

क) गार्सा द तासी (फ्रांसीसी विद्वान)

ग्रंथ: इस्तवार द ल लितरेत्यूर ऐंदुई ऐ ऐंदुस्तानी (1839 और 1847)

पद्धति: वर्णानुक्रम पद्धति (वर्णमाला के आधार पर)

तथ्य: हिंदी साहित्य का प्रथम इतिहास ग्रंथ। कुल 738 कवियों में हिंदी के केवल 72 कवि थे।

ख) शिवसिंह सेंगर

ग्रंथ: शिवसिंह सरोज (1883)

भाषा: हिंदी

तथ्य: किसी भारतीय विद्वान द्वारा हिंदी भाषा में लिखा गया पहला इतिहास ग्रंथ। लगभग 1000 कवि।

ग) जॉर्ज ग्रियर्सन

ग्रंथ: द मॉडर्न वर्नाक्युलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान (1888)

पद्धति: कालानुक्रमिक पद्धति। प्रथम वास्तविक इतिहास ग्रंथ।

तथ्य: सबसे पहले 'भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग' घोषित किया।

घ) आचार्य रामचंद्र शुक्ल

ग्रंथ: हिंदी साहित्य का इतिहास (1929)

पद्धति: विधेयवादी पद्धति (वैज्ञानिक विश्लेषण)

तथ्य: मूलतः 'हिंदी शब्दसागर' की भूमिका के रूप में छपा। सबसे प्रामाणिक ग्रंथ।

🎨 इतिहास ग्रंथ याद रखने की 'काव्य ट्रिक' "तासी ने फ्रेंच में लिखा, पहला ग्रंथ महान। शिवसिंह ने सरोज रचा, भाषा हिंदी जान॥
ग्रियर्सन लेकर आए, सच्चा काल-विभाजन। शुक्ल जी का 'इतिहास' है, वैज्ञानिक दिग्दर्शन॥"

2. हिंदी साहित्य का आरंभ (प्रथम कवि और समय)

विद्वान का नाम प्रथम कवि समय / शताब्दी परीक्षा का विशेष बिंदु
वरिष्ठ मत (सर्वमान्य) सरहपा (सरहपाद) 769 ई. (8वीं शताब्दी) राहुल सांकृत्यायन द्वारा स्वीकृत, सिद्ध साहित्य के कवि।
शिवसिंह सेंगर पुष्य या पुँड 10वीं शताब्दी इन्होंने इसे 'भाखा की जड़' कहा है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल राजा मुंज व भोज 993 ई. अपभ्रंश मिश्रित पुरानी हिंदी की शुरुआत यहाँ से मानते हैं।
डॉ. रामकुमार वर्मा स्वयंभू 693 ई. (7वीं शताब्दी) अपभ्रंश के पहले कवि को ही हिंदी का पहला कवि माना।
⚠️ परीक्षा ट्रैप अलर्ट: यदि सीधा प्रश्न आए कि "हिंदी का प्रथम कवि कौन है?" बिना किसी विद्वान के नाम के, तो उत्तर हमेशा 'सरहपा' होगा।

3. काल-विभाजन और नामकरण (आदिकाल)

आचार्य शुक्ल का काल-विभाजन

  • आदिकाल (वीरगाथा काल): संवत 1050 से 1375
  • पूर्व मध्यकाल (भक्तिकाल): संवत 1375 से 1700
  • उत्तर मध्यकाल (रीतिकाल): संवत 1700 से 1900
  • आधुनिक काल (गद्य काल): संवत 1900 से 1984

आदिकाल के विभिन्न नामकरण

  • वीरगाथा काल: आचार्य रामचंद्र शुक्ल
  • आदिकाल (सर्वमान्य): आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • बीजवपन काल: आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
  • सिद्ध-सामंत काल: राहुल सांकृत्यायन
🎨 नामकरण याद रखने की 'काव्य ट्रिक' "शुक्ल जी ने कह दिया, यह 'वीरगाथा काल'। हजारीप्रसाद पुकारते, सुंदर 'आदिकाल'॥
महावीर ने 'बीज' बोया, राहुल 'सिद्ध-सामंत'। रामकुमार के 'संधि-चारण', संशय हुआ अंत॥"

4. भक्तिकाल एवं रीतिकाल प्रवृत्तियाँ

भक्तिकाल (स्वर्णयुग)

निर्गुण धारा: संत काव्य (कबीर) और सूफी काव्य (जायसी - ठेठ अवधी)।

सगुण धारा: राम काव्य (तुलसी - साहित्यिक अवधी) और कृष्ण काव्य (सूरदास - ब्रजभाषा)।

"संतन को कहा सीकरी सों काम? आवत जात पनहियाँ टूटी, बिसरि गयो हरि नाम।" - कुंभनदास

रीतिकाल (उत्तर मध्यकाल)

रीतिबद्ध: शास्त्रीय नियमों में बंधे (केशवदास, चिंतामणि)।

रीतिसिद्ध: नियम जानते थे पर मुक्त रचना की (बिहारीलाल - गागर में सागर)।

रीतिमुक्त: स्वच्छंद प्रेम की पीर (घनानंद, बोधा)।

"अति सूधो सनेह को मारग है, जहाँ नेकु सयानप बांक नहीं।" - घनानंद

5. आधुनिक काल एवं गद्य विधाओं का विकास

विधा प्रथम रचना / ग्रंथ लेखक / रचयिता विशिष्ट परीक्षा तथ्य
उपन्यास परीक्षा गुरु (1882 ई.) लाला श्रीनिवास दास आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा मान्य हिंदी का प्रथम उपन्यास।
कहानी एक टोकरी भर मिट्टी (1901) माधवराव सप्रे आधुनिक शोधों के अनुसार हिंदी की पहली मौलिक कहानी।
नाटक नहुष (1857 ई.) गोपालचंद्र 'गिरिधरदास' भारतेंदु हरिश्चंद्र के पिता द्वारा रचित, भारतेंदु द्वारा मान्य प्रथम नाटक।
गीतिनाट्य करुणालय (1912 ई.) जयशंकर प्रसाद हिंदी का प्रथम काव्य-नाटक / गीतिनाट्य।
आत्मकथा अर्धकथानक (1641 ई.) बनारसीदास जैन पद्य में रचित हिंदी की पहली ऐतिहासिक आत्मकथा।
⚠️ एग्जाम ट्रैप - विधाओं का भ्रम: 'बाणभट्ट की आत्मकथा' नाम से आत्मकथा प्रतीत होती है, परंतु यह आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक ऐतिहासिक उपन्यास है। इसी प्रकार 'बीसलदेव रासो' नाम से वीर रस लगता है, पर यह शुद्ध वियोग शृंगार प्रधान ग्रंथ है।

6. आधुनिक काल के कालजयी ग्रंथ एवं पात्र

गोदान (1936) — मुंशी प्रेमचंद

केंद्रीय विषय: कृषक जीवन की महागाथा और महाजनी शोषण का चक्र।

मुख्य पात्र: होरी, धनिया, गोबर (विद्रोही), प्रो. मेहता, डॉ. मालती।

कामायनी (1935) — जयशंकर प्रसाद

केंद्रीय विषय: प्रलय के उपरांत आनंदवाद और समरसता की स्थापना।

प्रतीक विधान: मनु (मन), श्रद्धा (हृदय), इड़ा (बुद्धि)।

आपका बंटी (1971) — मन्नू भंडारी

केंद्रीय विषय: तलाकशुदा माता-पिता के बीच पिसते बच्चे की त्रासदी।

मुख्य पात्र: बंटी, शकुन (माँ), अजय (पिता)।

राम की शक्ति पूजा (1936) — निराला

केंद्रीय विषय: राम द्वारा शक्ति की मौलिक कल्पना और अंतर्द्वंद्व पर विजय।

विशेष: सामासिक एवं संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली की लंबी कविता।

🎯 परीक्षा हॉल 'रामबाण' त्वरित सार

* खड़ी बोली का विकास: खड़ी बोली गद्य का आरंभ भारतेंदु युग में हुआ, पर कविता में यह पूर्णतः द्विवेदी युग में स्थापित हुई।
* तार सप्तक (1943): प्रयोगवाद का प्रारंभ अज्ञेय द्वारा संपादित 'तार सप्तक' से माना जाता है (इसके नाम में 'प्रथम' नहीं आता)।
* अपभ्रंश को पुरानी हिंदी: सबसे पहले चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने अपने निबंध 'पुरानी हिंदी' में कहा था।

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