4. भक्तिकाल (पूर्व मध्यकाल): संवत 1375 से 1700 (1318 ई. से 1643 ई.)
भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का 'स्वर्णयुग' (जॉर्ज ग्रियर्सन के अनुसार) कहा जाता है। इस काल में लोक-भाषा (मुख्यतः ब्रज और अवधी) का चरम विकास हुआ और सांस्कृतिक समन्वय की एक अभूतपूर्व लहर उठी।
परीक्षा की दृष्टि से भक्तिकाल को दो मुख्य धाराओं और उनकी चार उप-शाखाओं में बाँटकर समझा जाता है:
क) भक्तिकाल का वर्गीकरण एवं प्रमुख प्रवृत्तियाँ
भक्तिकाल (संवत 1375 - 1700)
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1. निर्गुण काव्य धारा 2. सगुण काव्य धारा
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(क) ज्ञानाश्रयी (ख) प्रेमाश्रयी (क) रामाश्रयी (ख) कृष्णाश्रयी
(संत काव्य) (सूफी काव्य) (राम काव्य) (कृष्ण काव्य)
1. निर्गुण काव्य धारा
(क) ज्ञानाश्रयी शाखा (संत काव्य)
- प्रमुख कवि: कबीरदास (प्रवर्तक), रैदास, गुरु नानक, दादू दयाल, सुंदरदास (सबसे शिक्षित संत)।
- भाषा व शैली: सधुक्कड़ी और उलटबाँसी शैली। मुक्तक काव्य।
- मुख्य विशेषताएँ: निराकार ईश्वर (निर्गुण ब्रह्म) की उपासना, गुरु को ईश्वर से ऊँचा स्थान, बाह्याडंबरों, जाति-पांत और मूर्तिपूजा का तीव्र विरोध, रहस्यवाद की प्रधानता।
(ख) प्रेमाश्रयी शाखा (सूफी काव्य)
- प्रमुख कवि व ग्रंथ:
- पद्मावत (1540 ई.) — मलिक मोहम्मद जायसी (सूफी काव्य का महाकाव्य)।
- मृगावती — कुतुबन | मधुमालती — मंझन | चंदायन — मुल्ला दाऊद (प्रथम सूफी काव्य)।
- भाषा व शैली: ठेठ अवधी भाषा। मसनवी शैली (सर्गबद्धता के बजाय लगातार कथा, आरंभ में ईश्वर, पैगंबर और शाहे-वक्त की स्तुति)।
- मुख्य विशेषताएँ: ईश्वर को 'प्रियतमा' (स्त्री) और आत्मा को 'प्रेमी' (पुरुष) के रूप में चित्रित कर प्रेम के माध्यम से परमात्मा की प्राप्ति का संदेश। प्रतीकात्मकता (जैसे: पद्मावत में चित्तौड़=शरीर, राजा रत्नसेन=मन, पद्मावती=बुद्धि/परमात्मा)।
2. सगुण काव्य धारा
(क) रामाश्रयी शाखा (राम काव्य)
- प्रमुख कवि: गोस्वामी तुलसीदास (सर्वोच्च कवि), अग्रदास (रसिक संप्रदाय), नाभादास (भक्तमाल के रचयिता), केशवदास (शिल्प की दृष्टि से, रामचंद्रिका)।
- भाषा व शैली: साहित्यिक अवधी और ब्रजभाषा। मुख्य रूप से प्रबंध शैली (महाकाव्य)।
- मुख्य विशेषताएँ: मर्यादा पुरुषोत्तम राम की आराधना, दास्य भाव की भक्ति, लोक-मंगल की भावना, समाज में समन्वय (ज्ञान-भक्ति, राजा-प्रजा, शैव-वैष्णव के बीच) पर बल।
(ख) कृष्णाश्रयी शाखा (कृष्ण काव्य)
- प्रमुख कवि: सूरदास (अष्टछाप के जहाज), मीरांबाई, रसखान, नंददास।
- भाषा व शैली: शुद्ध, माधुर्यपूर्ण ब्रजभाषा। मुक्तक और गेय पद शैली।
- मुख्य विशेषताएँ: लीलापुरुषोत्तम कृष्ण की आराधना, सख्य और माधुर्य भाव की भक्ति, वात्सल्य और शृंगार रस की प्रधानता, भ्रमरगीत परंपरा के माध्यम से ज्ञान पर प्रेम की विजय।
💡 अष्टछाप (1565 ई.): आचार्य विट्ठलनाथ ने 8 कृष्णभक्त कवियों को मिलाकर 'अष्टछाप' की स्थापना की। इसमें 4 शिष्य वल्लभाचार्य के थे (कुंभनदास, सूरदास, परमानंददास, कृष्णदास) और 4 विट्ठलनाथ के (गोविंदस्वामी, छीतस्वामी, चतुर्भुजदास, नंददास)।
ख) प्रमुख ग्रंथ और रचयिता (क्विक टेबल)
| ग्रंथ | रचयिता | भाषा | काव्य रूप / विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| बीजक | कबीर (संकलनकर्ता: धर्मदास) | सधुक्कड़ी | तीन भाग हैं: साखी (दोहा), सबद (गेय पद), रमैनी (चौपाई)। |
| पद्मावत | मलिक मोहम्मद जायसी | ठेठ अवधी | 57 खंड, दोहा-चौपाई छंद। हिंदी का प्रथम बड़ा अन्यायोक्ति/समासोक्ति महाकाव्य। |
| रामचरितमानस | गोस्वामी तुलसीदास | साहित्यिक अवधी | 7 काण्ड (बाल, अयोध्या, अरण्य, किष्किंधा, सुंदर, लंका, उत्तर काण्ड)। |
| सूरसागर | सूरदास | ब्रजभाषा | भ्रमरगीत इसका सबसे महत्वपूर्ण उपालंभ काव्य अंश है। |
| भक्तमाल | नाभादास | ब्रजभाषा | इसमें 200 भक्तों के चरित्र और छप्पय छंदों का वर्णन है। |
🎨 भक्तिकाल को याद रखने की 'काव्य ट्रिक'
काव्य ट्रिक: कबीर ज्ञान की अलख जगाएँ, जायसी प्रेम की पीर। तुलसी मर्यादा लेकर आए, सूर बहायो रस-तीर॥ विट्ठलनाथ ने अष्टछाप की, सुंदर गढ़ी कतार। सगुण-निर्गुण के मेल से, स्वर्णयुग बना संसार॥
ग) महत्वपूर्ण परीक्षा-ोपयोगी सूक्तियाँ और पंक्तियाँ
कबीरदास: "मसि कागद छूयो नहीं, कलम गही नहिं हाथ।" (स्वयं के अनपढ़ होने की घोषणा)
मलिक मोहम्मद जायसी (पद्मावत): "मानुस प्रेम भयउ बैकुंठी, नाहिं त काह छार भइ मूठी।" (मानवीय प्रेम की महिमा)
तुलसीदास (रामचरितमानस): "कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई॥" (लोक-मंगल का सिद्धांत)
सूरदास (सूरसागर): "लरिकाई को प्रेम कहो अलि कैसे छूटत।" (कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम)
🎯 भक्तिकाल का 'एग्जाम ट्रैप' (जहाँ अक्सर नंबर कटते हैं)
- भक्ति का उदय: आचार्य शुक्ल मानते हैं कि भक्ति का उदय 'इस्लामी आक्रमण के कारण पराजित हिंदू जनता की निराशा' का परिणाम था, जबकि हजारीप्रसाद द्विवेदी इसे 'भारतीय चिंताधारा का स्वाभाविक विकास' मानते हैं। परीक्षा में नाम देखकर सही विकल्प चुनें।
- तुलसीदास की भाषा: तुलसीदास केवल अवधी के कवि नहीं हैं। उन्होंने अवधी (रामचरितमानस) और ब्रज (कवितावली, गीतावली, विनयपत्रिका) दोनों भाषाओं पर समान अधिकार से लिखा है।
- अष्टछाप के वरिष्ठ और कनिष्ठ कवि: अष्टछाप में सबसे वरिष्ठ कवि कुंभनदास थे और सबसे कनिष्ठ (छोटे) कवि नंददास थे। सूरदास काव्य-प्रतिभा में सबसे ऊपर थे, पर उम्र में दूसरे स्थान पर थे।
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