अनेकांत के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीपादन करने वाले भारतीय दर्शन के संभवतः प्रथम मनीषी, सत्य, अहिंसा के संदेश वाहक, "जियो ओर जीने दो" के पावन सन्देश से समस्त विश्व को मानवता धर्म से साक्षात्कार कराने वाले युग प्रवर्तक भगवान महावीर की जन्म जयंती पर सादर नमन, वन्दन...
तीर्थंकर वर्धमान महावीर ने कहा है - सत्य के अनेक कोण होते हैं। इसलिए किसी भी कोण पर विश्वास करने से पहले उस पर अपने समय के आलोक में सोचो, शंका और प्रश्न करो, फिर उसे स्वीकार करो। यही अवधि ज्ञान है। यह जरूरी नहीं है कि जो कभी किसी ने लिख दिया था, वही शाश्वत सत्य है। कोई भी सत्य अंतिम नहीं होता है, इसलिए लगातार शोध और परिशोध जरूरी है। यही परिशोधन विज्ञान का आधार है। इसलिए हर बात में 'शायद’ (स्यात्) का ध्यान रखा जाना चाहिए। यही 'स्यादवाद और अनेकांत' का सिद्धांत है जो विश्व को महावीर की अनुपम और महान देन है।
।। सतानंद पाठक।।

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